• रविवार, 14 अप्रैल, 2024

लग्नसरा में सूती वत्रों की जोरदार मांग  

उद्यमियों का ध्यान नवीनतम उत्पादनों की ओर

औद्योगिक परिस्थितियों में परिवर्तन का क्रम नया नहीं है। कई बार सामान्य चलती प्रक्रिया में ऐसा व्यवधान उपस्थित हो जाता है कि स्थिति स्थिर अवस्था में जाती है और उत्पादक मजबूरी में मायूसी के शिकार हो जाते हैं। इन हालातों के बल पर किसी किसी समाधान को खोज निकालते हैं। यहां के उद्यमियों का आरम्भ से आज तक का लेखा-जोखा देखा जाय तो प्रतीत होगा कि विषम परिस्थितियों में यह रंगाई-छपाई उद्योग किस प्रकार जीवन्त बना रहा। कई बार तो लगा कि यह औद्योगिक ताना-बाना पूरी तरह ध्वस्त हुए बिना नहीं रहेगा। इसके उपरांत भी यहां की आस्था प्रदत्त हवा के झोंकों ने क्या कमाल कर दिखाया कि उद्योग पुन: संचालित स्वत: ही होकर गति को पकड़ते गये। पूर्ववर्ती उद्योग की तुलना आज से की जाय तो सहसा विश्वास ही नहीं किया जा सकता कि टिन्नी उद्योग इस कदर भीमकाय रूप ले सकता है। वस्तुत: देखा जाय तो आज जिस रूप में उद्योग अवस्थित है उसका रूप अन्यत्र कहीं देखा नहीं जा सकता।

शिक्षा की कमी राजनैतिक सार संभाल के अभाव में विशालता की अनन्त विस्तार के उपभोग का यह उद्योग वांचित रहा, मगर वर्तमान तौर तरीको से लगता है स्थानीय रंगाई-छपाई उद्योग सर्वांगीण विकास को छू लेने में समर्थ होगा।

वर्तमान में नियमित उत्पादन के साथ अन्य विभिन्न उत्पादों के सृजन निर्माण को प्रश्रय मिल रहा है। उद्यमी विशेष प्रयास कर नवीनतम उत्पादों से नई श्रृंखला का निर्माण कर रहे हैं। गुणवत्ता की सहज सुगन्ध से इस क्षेत्र के नये उत्पादों को पूरा सम्बल मिल रहा है। स्थानीय उद्यमियों में जो नूतनता की लगन जग रही है वो विकास विस्तार का आवश्यक अंग है।