• रविवार, 14 अप्रैल, 2024

`किसानों' ने अवसर खोया   

पंजाब के किसानों के नाम पर आंदोलन कर रहे नेताओं की गेहूं और चावल के अलावा पांच फसलों को पांच साल तक के समर्थन भाव पर खरीदने की केद्र सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर देने से दोनों पक्षों का रुख सख्त हो बन गया है और समझौते की संभावना से इनकार कर दिया गया। केद्र सरकार ने प्रस्ताव दिया था कि जो किसान गेहूं और चावल की जगह कपास, मक्का, अरहर, उड़द और मसूर उगाने के इच्छुक होंगे केद्र सरकार उनकी सभी फसलें पांच तक समर्थन भाव पर खरीदेगी। केद्रीय एजेंसी नाफेड और सीसीआई से संबंधित एजेंसियों से अनुबंध करेगी। यदि यह प्रस्ताव मान लिया जाता है तो विशेष रूप से पंजाब- हरियाणा के किसानों को अपनी फसल पर जोखिम मुक्त उचित रिटर्न पाने का अवसर मिलता है। यदि फसलों में विविधता ला दी जाए तो कृषि की कई समस्याएं आसान हो जाएंगी। पंजाब की जमीन जैसी है उसे चावल की फसल के लिए अधिक पानी की आवश्यकता वाली फसलों के लिए उपयुक्त नहीं है। इसके स्थान पर अन्य फसलों को पैदावार से भूजल स्तर और नीचे जाने से रुक जाता है। जमीन को उसर बनने से रोकने के लिए मवेशियों का चारा उपलब्ध कराकर और पराली जलाना बंद करके प्रदूषण कम कर, भारत हर साल आयात होने वाले लाखों टन दालों को कम कर सकता है। हालांकि इस योजना में दो बड़ी कमियां हैं। प्रस्तावित खरीद उन किसानों तक सीमित है जो गेहूं और चावल के अलावा अन्य फसलों की पैदावार करते हैं। जो किसान वर्तमान में यह फसलें लगाते हैं उन्हें लाभ नहीं होगा। तथ्य यह है कि इस योजना को नाफेड और सीसीआई जैसे सरकारी एजेंसियों द्वारा कार्यान्वित किया जाना है। फिर भी यदि इसे स्वीकार कर लिया जाता है तो देश को लाभ होगा।