• मंगलवार, 05 मार्च, 2024

दो लाख करोड़ डॉलर के निर्यात लक्ष्य हासिल करने की रणनीति पर मंथन

हमारे संवाददाता 

नई दिल्ली । भारत की उभरती निर्यात गतिशीलता पर पीएचडी रिसर्च ब्यूरो एवं पीएचडी चøबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की तरफ से जारी नवीनतम रिपोर्ट में कहा गया है कि 2023 तक दो लाख करोड़ डॉलर के निर्यात लक्ष्य हासिल करने की रणनीति पर मंथन कर रहा है क्योंकि कोरोना काल के बाद भारत के निर्यात मोर्चे पर उल्लेखनीय वृद्वि हुई है।

दरअसल भारत की उभरती निर्यात गतिशीलता पर पीएचडी रिसर्च ब्यूरो एवं पीएचडी चøबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज द्वारा देश के 20 प्रमुख निर्यातकों के बीच किए गए सर्वेक्षण के आधार पर यह रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है जिसमें कहा गया है कि 2021 और 2022 के तहत निर्यात की वृद्वि क्रमश: 20 प्रतिशत और 9.7 प्रतिशत थी।जिसको लेकर पीएचडी चøबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष संजीव अग्रवाल ने यहां जारी एक प्रेस ब्यान में कहा कि केद्र सरकार की गतिशील नीति के साथ साथ निर्यातकों के वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जुड़ने के प्रयास से निर्यात में वृद्वि हुई है।उन्होंने कहा कि कोरोना काल के बाद मजबूत वापसी के बाद पिछले कुछ महीनों के तहत निर्यात की गति धीमी हो गई थी।यद्यपि अक्टूबर 2023 में निर्यात बढने से वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात में एक अल्पकालिक मंदी के बाद महत्वपूर्ण पुनरुद्वार के संकेत दिखाई दे रहे   हैं ।उन्होंने पिछले एक दशक के तहत निर्यात में काफी तेजी आई है जो कि वित्त वर्ष 2010-11 में 375 अरब डॉलर से बढकर वित्त वर्ष 2022-23 में 770 अरब डॉलर हो गया है।वहीं अवधि, गतिशीलता, विकेद्रीकरण,दिशा और आपदा प्रूफिंग के पांच प्रमुख तत्वों के साथ भारत की नई विदेश व्यापार नीति (एफटीपी) 2023 की शुरुआत का उद्देश्य निर्यातकों के लिए एक सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है।वहीं पीएचडी चøबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के कार्यकारी निदेशक डॉ.रणजीत मेहता ने कहा कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था के आकार और इसके विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के विस्तार पर चर्चा करते हुए भारत के निर्यात को बढाएगा।उन्होंने कहा कि एफटीपी 2023 का उद्देश्य प्रत्येक राज्य को वैश्विक व्यापार के साथ एकीकृत करने में सक्षम बनाने के लिए प्रचार और विकास करके वैश्विक बाजारों में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढाना है जो कि भारत के आत्मनिर्भर बनने के दृष्टिकोण के अनुरुप एक कदम है।