• शनिवार, 22 जून, 2024

निवेशक हैं? घबराएं नहीं   

शेयर बाजार में लगतार छह दिन की गिरावट के बाद थोड़ा सुधार देखा गया है। गिरावट के लिए समुद्र पार की वित्तीय और राजनीतिक घटनाएं जिम्मेदार है। अमेरिका में बॉन्ड का प्रतिफल पांच प्रतिशत से बड़ गया है। जो दर्शाता है कि वहां ब्याज की दर लंबे समय तक ऊंची ही रहेगी, ऐसा बाजार का मानना है। सितंबर तिमाही में अमेरिका की विकास दर 4.9 प्रतिशत जितनी ऊंची है और उसके लिए ग्राहक खर्च अधिक जिम्मेदार है इसलिए फेडरल रिजर्व ब्याज दर बढ़ाए ऐसी संभावना बढ़ गई है। तेल भाव पश्चित एशिया के संकट के कारण बढ़ने के बाद थोड़ा दबा है, लेकिन वह 90 डॉलर के आसपास है जो चिंता का कारण है। अमेरिका में ब्याज दर अधिक है। जिससे विदेशी निवेश संस्थाएं पूंजी देश के बाहर ले जाती हैं। सितंबर से उन्होंने 3.5 अरब डॉलर भारतीय बाजार से खींच लिया है।