• गुरुवार, 30 मई, 2024

आरोग्य योजना की बिमारियां 

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अमल में भारी गड़बड़ी होने की जानकारी मिली है। लोकसभा में पेश हुई काम्प्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनलर (कैग) के रिपोर्ट में धन का दुरुपयोग, फर्जी खाते, पर्याप्त सबूत के बिना पैसे का भुगतान जैसी गड़बड़िया पर प्रकाश डाला गया है। रिपोर्ट के अनुसार सात लाख से अधिक कार्ड एक ही खाते से जुड़े हुए थे। हजारों मामलों में आधार कार्ड या नामाकंन रसीद के बिना उपचार प्रदान किया गया और मूल व्यक्तियों के नाम पर दावे किए गए और भुगतान किया गया। इसके सामने इस योजना संस्थापक सीईओं द्वारा यह खुलासा किया गया कि योजना की शुरुआत में नामांकन के लिए मोबाइल नंबर की आवश्यकता होती थी, लेकिन कई लाभार्थी परिवारों के पास मोबाइल फोन नहीं थे इसलिए मौके पर मौजूदा कर्मचारियों ने डिफॉल्ट नंबर या वैकल्पिक नंबर लिख दिए थे। इसी तरह हजारों मामलों में इलाज के दौरान मरीज की मृत्यु के तुंरत बाद अस्पतालों में दावा किया गया।  थोड़ी गड़बड़ जरूर है। दरअसल योजना के अधिकारी भी फर्जी दावों के खिलाफ अभियान चलाते रहते ह। इसमें उन्होंने एआई की भी मदद ली है। दो सौ से अधिक अस्पतालों को मान्यता प्राप्त सूची से हटा दिया गया है और पांच लाख से अधिक कार्ड को रद्द कर दिया गया है।